बकरा ईद क्यो मनाया जाता है-आखिर इस दिन क्यो मुस्लिम लोग बकरो की कुर्बानी देते है

बकरा ईद क्यो मनाया जाता है- बकरीद  (ईद -उल-अद्’हा ) जिसका पूरा मतलब होता है कुर्बानी की ईद) . पूरे दुनिया के मुसलमानो या कहे तो इस्लाम धर्म में विस्वास करने वाले लोगो का एक प्रमुख त्योहार  है।  रमजान के पवित्र महीने के खत्म होने के बाद लगभग 70 दिनों के बाद बकरा ईद आता है जिसे पूरे दुनिया के मुस्लिम लोग बड़े ही धूम धाम से मानते है और इसी दिन काफी शंख्या में बकरे  की कुर्बानी दी जाती है।

ऐसे में हमारे मन में कई तरह से सवाल उठते है की आखिर बकरे की ही कुर्बानी क्यो? तो सुनिए हम  आज आप को पूरा विस्तार से बताते है की बकरा ईद क्यो मनाया जाता है- अगर आप भी जानने के इच्छुक है तो कृपया करके पूरा पोस्ट को ज़रूर पढ़े और अगर अच्छा लगे तो अपने दोस्तों के साथ भी ज़रूर शेयर करे-

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आखिर बकरे की ही कुर्बानी ही क्यो

बकरा ईद क्यो मनाया जाता है

 

ऐसा कोई मान्यता नहीं है की आप सिर्फ बकरो की ही कुर्बानी दे सकते हो।  अरब देशो में ऊट की भी कुर्बानी दी जाती है।  हमारे देशो में काफी जगहों पर भी बड़े जानवरो की कुर्बानी दी जाती है।

 

बकरीद की धार्मिक मान्यता

इस्लाम धर्म में इस त्यौहार के पीछे ए मान्यता है की हजरत इब्राहिम ने एक सपना देखा था जिसमे अल्लाह ने उन्हें फ़रमाया की “हजरत   इब्राहिम आपको जो इस जहा में सबसे ज्यादा अज़ीज या प्यारा हो उसे खुदा के हुक पर कुर्बान कर दो यानी उनकी कुर्बानी दे दो”  उन्होंने उस सपने को मान लिया और वो अपने 10 वर्षीय सबसे प्यारे बेटे हजरत इस्माइल को ईश्वर की राह पर कुर्बान करने निकल पड़े।

इस्लामिक मान्यताओं में हजरत इब्राहिम को अल्लाह का पैगंबर बताया जाता है।  हजरत इब्राहिम दुनिया की भलाई करने में लगे रहे उनका जीवन जनसेवा और समाजसेवा  बीता।  हजरत इस्माइल उनके सबसे प्यारे इसलिए थे की बहुत मान्यतावो के बाद करीब 90 साल की उम्र में उनको चाँद सा बीटा इस्माइल मिले।

चाक़ू इस्माल के गर्दन पे न चल पायी

अल्लाह के हुक्म पर हजरत इब्राहिम को आप नए नए कपड़े  पहना कर कुर्बानी देने के लिए घर से निकल पड़े। सबसे पहले तो उन्होंने अपनी आखो पर काली पट्टी बांध ली इसलिए क्योकी वो उनके सबसे अज़ीज बेटे थे और वो खुले आखो से क़ुर्बानी होना नहीं देखना चाहते थे।

जब उन्होंने कुर्बानी देने के लिए उनको जमीन पर लिटाये और जब गर्दन पर तेज छूरी चाली लेकिन वो तेज़ चोरी उनके नाज़ुक गर्दन को न काट पायी।

ठीक उसी समय उनके छूरी के नीचे एक भेड़ आ गया और हजरत इस्माइल की गर्दन वहा से हट गयी जब उन्होंने अपनी आखे खोली तो हजरत इस्माइल को खेलते हुए देखा और इस्माइल के जगह पर एक भेड़  की कुर्बानी दी।  तब से लेकर आजतक मुस्लिम बकरा ईद में बकरा काटते है।

 

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तभी से है इस क़ुरबानी का प्रचलन

हजरत इब्राहिम के विस्वास कुर्बानी से खुश होकर अल्लाह ने उन्हें पैगम्बर बना दिया। इसलामिक इतिहास की इस घटना के बाद ही बकरे की क़ुरबानी देने की परम्परा चली है आ रही है।  इस्मालिक केलिन्डर के अनुसार, बकरा ईद जिल्हीज़ज के महीने में मनाई जाती है।

बकरा ईद के गोस्ट को 3 हिस्सो में बाटना-

बकरीद का त्यौहार इस्लाम के पांचवे सिद्धांत हज को भी मान्यता देता है. बकरीद के दिन मुस्लिम बकरा, भेड़, ऊँट, जैसे किसी जानवर की कुर्बानी देते है. बकरीद के दिन गोस्त को इस्लामिक शरीयत के अनुसार इसे तीन हिस्सों में बता जाता है-

  1. एक खुद के लिए
  2. दूसरा सगे संबंधियों के लिए
  3. तीसरा गरीबो के लिए

 

किसी को भी मानव जीवक का त्याग नहीं करना चाइये

हजरत इब्राहिम ने ए  बताया की ईश्वर के प्रति उनके प्रेम ने अन्य सभी की प्रभावित किया है की अल्लाह की राह पर उन्होंने अपने सबसे प्यारे बेटे को कुर्बानी दे दिए थे लेकिन उसी समय अल्लाह के हुक्म पर एक दुम्बा या भेड़ा आ गया।  मुसलमान  हर साल बकरा ईद पर  इस इस बलिदान को याद करते है.

 

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कैसे मानते है बकरा ईद

बकरा ईद के दिन मुस्लमान सुबह सुबह नए नए कपड़े  पहन कर तैयार हो जाते है ईदगाह जाने के लिए।  सबलोग ईद गाह जाकर वह पर बकराईद की नमाज पढ़ते है. नमाज पढ़ने के बाद एक दुसरे को गले मिलते है।  पूरा नमाज खत्म होने के बाद सब लोग अपने अपने घर वापस आ जाते है घर आपने के थोड़ी देर के बाद ही बकरो की कुर्बानी देना का सिलसिला सुरु हो जाता है।  जिसके पास जो भी जानवर होता है कुर्बानी करने के लिए जैसे बकरा, भेड़, ऊट आदि की कुर्बानी देना शुरू कर देते है।

सबके साथ गोस्त को  बाटना और खाना

बहुत से मुसलमान अपने ईद त्योहारों  पर अपने गैर मुस्लिम दोस्तों, पडोसिओ , सहकर्मियों, और सहपाठीयो को इस्लाम और मस्लिम संस्कृत के बारे बेहतर तरीके से प्राचित  करने के लिए इस अवसर पर आमंत्रित करते है।

निष्कर्ष –

तो दोस्तों आपके भी दिमाग में ए बात ज़रूर रहा होगा की आखिर मुस्लिम लोग बकरे की कुर्बानी कुए देते है और यह कितना सही है।

आसा करता हु मेरे द्वारा लिखा गया पोस्ट “बकरा ईद क्यो मनाया जाता है” ज़रूर पसंद आया होगा  . ए  जानकारी  आप अपने दोस्तों को भी शेयर करके बता सकते है। …………………….

धन्यवाद 

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