राष्ट्रीय बाघ दिवस कब है और यह क्यों मनाया जाता है। जानिए पूरी जानकारी भारत में…

राष्ट्रीय बाघ दिवस 2020 :- जानिये टाइगर डे के मनाये जाने के पीछे का सबसे ख़ास वजह की आखिर इसे पूरे दुनिया में क्यों मनाया जाता है- 

राष्ट्रीय बाघ दिवस –अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस या विश्व टाइगर दिवस कब मनाया जाता है 

आज है 29 जुलाई आज के ही दिन पूरे विश्व में “विश्व बाघ दिवस”  मनाया जाता है।  बाघों के अवैध शिकार और वनो के लगातार काटने के कारण विश्व के कई देशो में बाघों की संख्या में काफी ज्यादा गिरावट आयी है।  ए बात हम नहीं WWF  की रिपोर्ट कह रही है।  

इस दिवस को मनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य दुनिया भर में जंगली बाघों के निवास के संरक्षण, विस्तार तथा उनकी स्थिति के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है।  “उनका अस्तित्व हमारे हाथो में है” के नारो के साथ पूरे विश्व में इसे मनाया जाता है।  ‘वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फण्ड’ के अनुसार पूरे विश्व में केवल 3890 बाघ बचे है, जिनमें सबसे ज्यादा ढाई हजार बाघ भारत में है।  इनके अस्तित्व पर लगातार खतरा मंडरा रहा है और यह प्रजाति विलुप्त होने की स्थिति में है।

राष्ट्रीय बाघ दिवस

राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की शुरूआत कब हुई 

वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्स वर्ग में हुए बाघ सम्मेलन में 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।  सम्मेलन में 13 देशों ने भाग लिया था और उन्होंने 2022 तक बाघों की संख्या में दोगुनी बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा था।  बाघ जंगल के स्वस्थ्य और शाकाहारी वन्य प्राणियों की उपलब्धता दर्शाते हैं, जहां अच्छा जंगल होगा वहां बाघ ज़रूर होगा।

बाघों के संरक्षण के लिए कई देशों में चला रहे हैं लेकिन फिर भी पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि इनकी संख्या घटने की ऐसे ही रही तो आने वाले एक-दो दशक में बाघ का नामोनिशान भी मिट जाएगा। आप और हम जिस बाघ को देख कर डर जाते हैं और उनकी गरज सुनकर अच्छे-अच्छे काँप जाते हैं आज उनके खुद के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

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यह एक चिंता का विषय है जिसे हम सबको मिलकर जरूर सोचना चाहिए।लेकिन  WWF  के अनुसार 2016 में भारत की आबादी वाले विश्व के 13 देशों में बाघों की कुल संख्या 3948 थी वहीं भारत में बाघों की कुल संख्या 1706 .  भारत में बाघ संरक्षण के लिए काफी सराहनीय कार्य किया है वर्ष 2006  में केवल 1411 बाघ थे जो 2014 में बढ़कर 2226 हो गए थे।  भारत में प्रत्येक 4 वर्ष बाद बाघ की गणना की जाती है।  कर्नाटक भारत का ऐसा राज्य जिसमें बाघों की संख्या सबसे अधिक है।

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फण्ड फॉर नेचर ( WWF ) क्या है 

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ इनफार्मेशन एक अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन है।   यह संगठन वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्य करता है।  इसकी स्थापना 29 अप्रैल , 1961  में की गयी थी।   इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड ले रुए मॉवेरनी  में स्थित है।  इस संगठन का उद्देश्य पर्यावरण के प्रभाव को कम करना है।  WWFवर्ष 1998 से हर दो साल के बाद लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट प्रकाशित करता है।

राष्ट्रीय बाघ दिवस -भारत का राष्ट्रीय पशु – बाघ 

बाघ को भारत का राष्ट्रीय पशु कहा जाता है।  बाघ देश की शक्ति,  सतर्कता, बुद्धि और धीरज का प्रतीक है।  भारतीय उपमहाद्वीप का प्रतीक है और उत्तर पश्चिमी क्षेत्र को छोड़कर पूरे भारत में पाया जाता है।   खुले जंगल नाम सदाबहार वन से लेकर मैंग्रोव दलदलों तक इसका क्षेत्र फैला हुआ है, लेकिन राष्ट्रीय पशु बाघ को आईयूसीएन ने लुप्त होती प्रजाति की लिस्ट में रखा हुआ है, और जरूरी संसाधनों में कमी के कारण देश में बाघों की संख्या में लगातार गंभीर गिरावट आई है।

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रॉयल बंगाल टाइगर को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने के बाद 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम को लागू किया गया इस।  अधिनियम के तहत सरकारी एजेंसियां बंगाल बाघों के संरक्षण के लिए कोई भी सख्त कदम उठा सकती है।  भारत में रॉयल बंगाल टाइगर की व्यावहारिकता को बनाए रखने और उनकी संख्या में वृद्धि करने के उद्देश्य में प्रोजेक्ट टाइगर लांच किया गया था मौजूदा समय में भारत में 48 बाग उद्यान है जिनमें से कई जीआईयस प्रणाली का इस्तेमाल कर बाघों की संख्या में वृद्धि करने में सफल रहे हैं।  इन उद्यानों में बाघों के शिकार को लेकर काफी सख्त नियम बनाए गए हैं। साथ ही इसके लिए समर्पित टास्क फोर्स की भी स्थापना की गई है।. रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान इसका एक शानदार उदाहरण है।

राष्ट्रीय बाघ दिवस –बाघों की प्रमुख प्रजातिया-

वर्तमान में बाघों की शंख्या आपने न्यूनतम स्तर पर है।  बाघों की कुछ प्रजातियां पहले ही विलुप्त हो चुकी है।  पूरी दुनिया में बाघों की कई तरह की प्रजातियां मिलती है।

  • बंगाल टाइगर:  बंगाल टाइगर या पेन्थरा टिगरिस, प्रकृति की सबसे सुन्दर परजातियो में से एक है।  यह बाघ परिवार की एक उप प्रजाति है,  और भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और दक्षिण तिब्बत के छेत्रो में पायी जाती है।  इसके शौर्य, सुंदरता, और बलशाली रूप को देखते हुए बंगाल टाइगर को भारत के राष्ट्रीय पशु के सम्मान से नवाज़ा गया है।  अन्य जीवो अपेछा बाघों की देखने हुए सुनने की शक्ति कही ज़ादा होती है।
  •  साउथ चाइना बाघ : साउथ चाइना टाइगर इस प्रजाति के नर बाघों की लंबाई 230  से 260 सेंटीमीटर और वजन लगभग 30 से 180 किलोग्राम होता है।  वही, मादा बाघों की लम्बाई 220 से 240 सेंटीमीटर और वजन लगभग 100 से 110 किलोग्राम होता है।
  • सुमंत्रण बाघ: ए  बाघ सिर्फ सुमात्रा आइसलैंड में पाए जाते है।  साल 1998  में इसे एक विशिष्ट उप प्रजाति के रूप म सूचीबद्ध किया गया था।  यह प्रजाति भी भारत की लुप्तप्राय प्रजातियो में शामिल है।
  • मलयन बाघ : मलयन बाघ की प्रजाति मलय प्रायदीप में पायी जाती है।
  • साइबेरियन बाघ: साइबेरियन बाघ की प्रजाति साइबेरिया के सुदूर पूर्वी इलाके अमर-उसर के जंगलो में पायी जाती है।  यह उत्तर कोरिया की सीमा के पास उत्तर पूर्वी चीन में हुंचुन  नेशनल साइबेरियाई टाइगर नेचर रिजर्व  में कुछ संख्या में है और इनकी संख्या रूस के सुदूर पूर्व में भी पायी जाती है।
  • इंडोचाइनीज बाघ: इंडोचाइनीज टाइगर बाघ की यह प्रजाति थाईलैंड, कम्बोडिया , चीन, बर्मा, और वियतनाम देशो में पायी जाती है।  इस प्रजाति के बाघ पहाड़ो पर ही रहते है।

बाघ की आबादी में कमी के मुख्य कारण : 

राष्ट्रीय बाघ दिवस

निवास स्थानों के लिए लगातार जंगलो की कटाई – 

कागज,ताड़, आवास ,फायरवुड जैसे विभिन्न देशों के लिए जंगलों को काटा जा रहा है वनों की कटाई वास्तव में आधुनिक समय और ऐतिहासिक समय में विलुप्त होने वाली प्रजातियों की एक बड़ी संख्या का कारण रही है।  यह हमेशा अपने पिछले राज्य की बड़ी जैव विविधता का अभाव है। मूल वन के विलुप्त होने के साथ, कई प्रजातियां विलुप्त हो जाती हैं और कई जो अपनी अनुवांशिक विविधता और भिनता का एक बहुत कुछ नहीं खोते है।

बाघ की खाल:

भाई के शरीर के अंगों के लिए उपभोक्ताओं की मांग के लिए सबसे बड़ा खतरा है। बाघों को उनकी त्वचा हड्डियां,दांतो,नाखूनों आदि के लिए अवैध रूप से शिकार किया जा रहा है जो औषधीय उपयोग और उपचार के लिए अधिक मूल्यवान है पिछले 10 वर्षों में उपभोक्ता की मां को पूरा करने के लिए 1000 से अधिक बाघों का शिकार किया जा चुका है।

बाघों का शिकार:

कई लोग हैं जो खेल के लिए अन्य सजावटी उद्देश्यों के लिए बाग का इस्तेमाल बाघों का शिकार करते हैं।कुछ लोगऐसे है जो दूसरो की ज़रूरतों की पूरा करने यानी एक बड़े बिज़नेस के तौर पर इनका शिकार करते है।  चीन में कई लोगों का मानना है कि बाघ के मांस और हड्डियों में औषधीय तत्व होते हैं जो मानव स्वस्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।

बाघों की आबादी में बीमारी का फैलाव

एक निश्चित बीमारी है जो बाघों में महामारी मि तरह फैलती है।  फेलिन पैन्यूकोपेनिया, तपेदिक, सर्कोसिस्टिक जैसी बीमारियों को बाघों के खतरे में डालना पड़ता है।  हलाकि अब काफी काम बाघ इस बीमारी से मरते है।

बाघ को कैसे बचाये- 

  • आस पास रहने वाले लोगों को शिक्षित करें जो जंगल के पास रहते हैं उन्हें परिस्थितिकी तंत्र में बाघों के महत्व के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है।  अगर बाघ नहीं है तो जंगल नहीं होंगे क्योंकि सभी घास खाने वाले जानवर ही रहेंगे।
  • शिकार पर रोक लगानी चाहिए।  सरकार को बाघों और जंगली जानवरों का शिकार करने वालों को सजा देनी चाहिए अगर कोई बात का शिकार करता है तो तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन और वन विभाग को सूचित करें।
  • खबर फैलाये और दूसरे को बताएं कि बात करने की आवश्यकता है और मीडिया में विज्ञापन दिया जाना चाहिए सरकार को बाघों को बचाने के संबंध में लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करना चाहिए।
  • पुलिस को सूचित करें उन्हें इस बात की जानकारी दें कि कैसे बाघों की संख्या खत्म होते जा रहे हैं और उन्हें जल्द से जल्द कोई कड़ा एक्शन लेने चाहिए

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राष्ट्रीय बाघ दिवस – बाघों के बारे में रोचक तथ्य:

  • बाघ अपने मजबूत पैरों की सहायता से बड़ी आसानी से अपने शिकार को पकड़ लेता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाघ के पैर इतने मजबूत होते हैं कि वह मरने के बाद भी खड़ा रह सकता है।
  • अगर आपका सामना कभी बाघ से हो जाए और यदि आप सीधे बाघ की आंखों में देखेंगे, तो वहां आप  पर हमला करने से पहले सोचेगा, या यह भी हो सकता है कि वह आप पर हमला करने का इरादा बदल दे। अगली बार कभी अगर आपका बाघ से सामना हो तो एक बार जरूर ट्राई करें लेकिन जरा सोच समझकर।
  • क्या आपको पता है जब बाघ जन्म लेते हैं तो वह अंधे होते हैं अपने जन्म के 1 सप्ताह तक देख नहीं सकते हैं वही आधे से ज्यादा बाघ युवावस्था में ही मर जाते हैं।
  • बाघ करीब 5 मीटर तक की ऊंचाई कूद सकता है और वह 6 मीटर तक की उचाई भी बड़े आराम से कूद सकता है।
  • बाघ का वजन 300 किलो तक का होता है वही उनका दिमाग 300 ग्राम का होता है।
  • आपको तो पता ही होगा कि बाघ काफी तेजी से भागते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बंगाल टाइगर की दहाड़ रात के समय 2 किलोमीटर तक की दूरी पर भी आसानी से सुनाई दे सकती है।
  •  आज से करीब 100 साल पहले बाघ की 9 प्रजातिया पाई जाती थी पिछले 80 सालों में बाघों की तीन प्रजातिया खत्म हो चुकी है और आज के समय में सिर्फ 6 प्रजातिया ही रह गई है।

 

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