Mother Teresa Biography in Hindi.मदर टेरेसा का जीवन परिचय और उनके वचन

मदर टेरेसा का जीवन परिचय-  आज मदर टेरेसा की 109वी जयंती है. शांति दूत मदर टेरेसा ममता की मूरत थी. दीन  और दुखी लोगो को गले लगाना और हमेशा बीमार लोगो के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोसिस करना ही  पहचान थी।  आज हम उनके बारे में ऐसी बाते आपको बताने वाले है जिससे आपका सर गर्व से ऊँचा हो जायगा। 

मदर टेरेसा का जीवन परिचय

मदर टेरेसा का जीवन परिचय Mother Teresa Biography in Hindi

आजकल इस दुनिया में लोग सिर्फ और सिर्फ अपने लिए ही जीते है, लेकिन इस दुनिया में महान वही कहलाता है जो अपने स्वार्थ को काफी पीछे छोड़ कर दूसरो के लिए अपनी जिन्दगी नौछावर कर दे, वही इंसान महान कहलाता है, और लोग इन्हे जीते जी तो याद ही करते है लेकिन मरने के बाद भी अपने दिलो से नहीं निकलते है, ऐसी ही एक महान हस्ती का नाम है मदर टेरेसा , दया, निस्वार्थ भाव, प्रेम,की मूर्ती मदर टेरेसा ने अपना पूरा जीवन दूसरो की सेवा में लगा दिया।

मदर टेरेसा  के अंदर अपार प्रेम था, जो किसी विशेष व्यक्ति के लिए बल्कि हर उस इंसान के लिए था, जो गरीब, लाचार,बीमार, और वो अपने जीवन में अकेला था। लोगो की सेवा को करने के लिए ही मदर टेरेसा ने 18  साल की उम्र में ही नर्स बन गयी और यही से उन्होंने अपने जीवन को एक नयी दिशा दे दी.

आपको जान कर आश्चर्य होगी की मदर भारत की न होते हुए भी उन्होंने भारत की धरती और यहाँ के लोगो से अपार प्रेम किया और जब पहली बार वो भारत आयी तो यहाँ के लोगो से प्यार कर बैठी और यही रह कर लोगो की सेवा की। कुछ ही दिनों में इन्होने निर्णय लिया की अब यही ही अपना समय बिताना है, उन्होंने भारत देश के लिए अभूतपूर्व काम किये है।

मदर टेरेसा का शुरुआत के जीवन और उनका परिवार ( Mother Teresa Early Childhood Education 

जीवन परिचय का Main Point  मदर टेरेसा का जीवन परिचय 
पूरा नाम अगनेस गोंझा बोयजिजु
जान तारिख 26 अगस्त 2020
जान स्थान स्कोप्जे शहर, मेसेदोनिया
माता पिता का नाम द्रना बोयाजू – निकोला बोयाजू
मृत्यु 5 सितम्बर 1997
भाई-बहन 1 भाई 1 बहन
धर्म कैथलिक
कार्य मिशिनरी ऑफ़ चैरिटी की स्थापना

मदर टेरेसा  का जन्म 26 अगस्त 1910 को  स्कोप्जे शहर, मेसेदोनिया में हुआ।  उनके पिता निकोला बोयाजू एक साधारण व्यवसाई थे। मदर टेरेसा का वास्तविक नाम अगनेस गोंझा बोयजिजु है।  अल्बेनियन भाषा में गोंझा का अर्थ फूल की कली होता है।  जब वह मात्र 8 साल की थी तभी उनके पिता परलोक सुधार गए।  इसके बाद उनके लालन-पालन की जिम्मेदारी उनके माँ  द्रना बोयाजू  के ऊपर आ गई।

पिता के जाने के बाद मदर टेरेसा के परिवार को आर्थिक परेशानी से गुजरना पड़ा लेकिन उनकी माता ने उनको बचपन से ही मिल बांट कर खाने से शिक्षा दी थी उनकी माता कहती थी जो कुछ भी मिले उसे सबके साथ मिल बात कर खाना है तो कोमल मन की मदर टेरेसा अपनी मां से पूछती की वो कौन लोग हैं जिनके साथ मिल बैठकर खाये? तब उनकी माता कहती कभी-कभी हमारे रिश्तेदार से कभी वह सभी लोग जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।  माता की बात अ\गनेश के कोमल मन में घर कर गई, और उन्होंने इसे अपने जीवन में उतारा इसी के चलते आगे चलकर मदरसा बन गई .

मदर टेरेसा का  पूरा नाम क्या है?

मदर टेरेसा का वास्तविक नाम अगनेस गोंझा बोयजिजु है।  अल्बेनियन भाषा में गोंझा का अर्थ फूल की कली होता है।  जब वह मात्र 8 साल की थी तभी उनके पिता परलोक सुधार गए।  इसके बाद उनके लालन-पालन की जिम्मेदारी उनके माँ  द्रना बोयाजू  के ऊपर आ गई।

मदर टेरेसा का भारत आना व उनके द्वारा किये गए कार्य (Mother Teresa service in India

मदर टेरेसा अपने तीन और सिस्टरो के साथ आयरलैंड से 6 जनवरी, 1920 को कोलकाता में लोरेटो कान्वेंट पहुंची। वो वो बहुत ही अनुशासित शिक्षिका थी, परन्तु,विद्यार्थी उनसे काफी ज्यादा पये करते थे।  उन्होंने वर्ष 1944 में सेंत मैरी स्कूल की प्रधानाचार्य का पद प्राप्त किया। मदर टेरेसा नर्शिंग ट्रेनिंग करने के बाद वर्ष 1948  में वापस कोलकाता आ गयी, और वह पहली बार तालतला गयी, जहा वो गरीब, बुज़ुर्ग और असहाय लोगो की देखभाल करने वाली संस्था के साथ रही।  उन्होंने गरीबी, लोगो के बीच फैलती बीमारी, लाचारी वा अज्ञानता को बहुत करीब से देखा ये सब बाते उनके मन में घर कर गयी इस वजह से उन्होंने ने मरीज़ो के घाओ को धोया, उनकी मरहम पट्टी की और उनको फ्री में दवाइया दी.

मदर टेरेसा ने वर्ष 1949 में असहाय, गरीब और बीमार लोगो की सहायता करने के लिए मिशिनरी ऑफ़ चैरिटी की नीव रखी, जिसे रोमन कैथोलिक चर्च में 7 अक्टूबर 1950 को मान्यता दी। इसी के साथ ही इन्होने पारम्परिक कपड़ो को त्याग कर नीली किनारो वालो साडी पहनने का निर्णय लिया

मदर टेरेसा का योगदान ( Mother Teresa Contribution )

मदर टेरेसा दीक्षा के साथ 18 साल की उम्र में सिस्टर टेरेसा बन गयी। वर्ष 1948में उन्होंने बच्चो को पढ़ाने के लिए एक स्कूल की स्थापना की। इसके बाद मिशनरी ऑफ़ चैरिटी की स्थापना की।

एक कहावत काफी फेमस है की – “सच्चा समर्पड़ और कड़ी मेहनत कभी भी विफल नहीं होती” ये कहावत मदर टेरेसा के साथ सच साबित हुयी।  वर्ष 1996 तक मदर टेरेसा के मिशनरियो ने लगभग 125 देशो में 755 निराश्रित  गृह (Deastitute HOuse ) खोले, जिसमे लगभग पांच लाख लोगो को भर पेट भोजन उपलबध कराया गया।

मिशनरी ऑफ़ चैरिटी क्या है? (What is Missionary of Charity )

7 अक्टूबर 1950 में मदर टेरेसा के अत्यधिक प्रयास के चलते उन्हें मिशनरी आफ चैरिटी बनाने की परमिशन मिल गई।  इस संस्था में वह वोलिंटर संत मैरी स्कूल के शिक्षक की थी,जो सेवा भाव से इस संस्था से जुड़े थे. शुरुआत में इस संस्था में सिर्फ 12 लोग कार्य किया करते थे आज यहां चार हजार से ज्यादा नन काम कर रही हैं।  इस संस्था के द्वारा अनाथालय, नर्सिंग होम, वृद्धाश्रम, बनाए गए। मिशनरी आफ चैरिटी का मुख्य उद्देश्य उन लोगों की मदद करना था  जिनका दुनिया में कोई नहीं है. उस समय कोलकाता में प्लेग व कुष्ठ रोग की बीमारी फैली हुई थी। मदर टेरेसा व उनकी संस्था ऐसे रोगियों की खुद सेवा किया करती थी वे मरीजों के घाव हाथ से साफ़ कर मरहम पट्टी किया करती थी।

मिशनरी ऑफ़ चैरिटी से जुड़ने के लिए क्या चीजे ज़रूरी होनी है? 

इसके सदस्य को धार प्राणों से अनजान (Ignorant ) रहना पड़ता है

  • पवित्रता (Purity )
  • गरीबी (Poverty)
  • आज्ञाकारीता (Obedience )
  • प्रतिज्ञा (Pledge)

मिशनरी ऑफ़ चैरिटी  से जुड़े लोग दुनिया भर में गरीब बीमार लोगों की सेवा और सहायता में योगदान करते हैं साथ ही बाहर से आने वाले लोगो, अनाथ विभाजन, युद्ध पीड़ितों की सेवा करें।  साथ ही अनाथो को भोजन शिक्षा आदि प्रदान करते है । साथ ही इनके अनेक अनाथ आश्रम,  विद्याश्रम और अस्पताल का भी इंतजाम करते है।

मदर टेरेसा की मृत्यु ( Mother Teresa Death) 

मदर टेरेसा वर्ष 1983 में 73 वर्ष की आयु में रोम में पॉप जॉन पॉल द्वितीय से मिलने गईं थी, जहा उन्हें पहला हृदयाघात आया । इसके पश्चात वर्ष 1989 में उन्हें दूसरा हृदयाघात आया, जिसके कारण उनका स्वास्थ्य निरंतर गिरता चला गया और  5 सितम्बर, 1997 को उनकी मृत्यु हो गई ।

मदर टेरेसा की मृत्यु के समय तक ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ में 4000 सिस्टर और 300 अन्य सहयोगी संस्थाएं कार्य कर रही थीं जो विश्व के 123 देशों में समाज सेवा का कार्य कर रही थी । समाज सेवा और ग़रीबों की देखभाल करने हेतु  पोप जॉन पाल द्वितीय ने 19 अक्टूबर, 2003 को रोम में मदर टेरेसा को “धन्य” घोषित किया था |

मदर टेरेसा अवार्ड व अचीवमेंट ( Mother Teresa Awards and Achievments

निःस्वार्थ होकर गरीब, असहाय लोगों की सेवा करने के लिए उन्हें कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।  भारत सरकार ने उन्हें मानवता की सेवा के लिए साल 1962 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा और फिर बाद में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।

इसके अलावा उन्हें मानव कल्याण के लिए किए गए कामों के लिए साल 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से भी नवाजा गया।  मदर टेरेसा नोबेल पुरस्कार की $192000 की धनराशि गरीबों की सहायता के लिए इस्तेमाल किया

इसके साथ ही साल 1985 में उन्हें अमेरिका मेडल ऑफ फ्रीडम अवार्ड से भी नवाजा गया।

मानव कल्याण के लिए जिस निस्वार्थ भाव से काम किया वह वाकई तारीफ के काबिल है।  मदर टेरेसा से सभी को परोपकार, दया, सेवा की प्रेरणा लेने की जरूरत है के काबिल है।

Mother Teresa Awards 

  • 1962 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया
  • 1980 में भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया
  • 1950 में अमेरिकी सरकार द्वारा मेडल ऑफ फ्रीडम अवार्ड दिया गया
  • 1979 में मदर टेरेसा को गरीबों की मदद के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया
  • 2003 में पोप जॉन पॉल ने मदर टेरेसा को धन्य कहा , उन्हें ब्लेस्ड टेरेसा ऑफ़ कलकत्ता कहकर सम्मान्नित किया

इस महान आत्मा को हमारी टीम की तरफ से भावपूर्ण श्रद्धांजलि

मदर टेरेसा के अनमोल वचन (Mother Teresa  quotes )

मदर टेरेसा का जीवन परिचय

 

  • आप 100 व्यक्तियों की सहायता नहीं कर सकते तो केवल एक ही Mother Teresa  quotes

 

मदर टेरेसा का जीवन परिचय

Mother Teresa Biography in Hindi

  • व्यक्ति की सहायता कर दी
  • मैं चाहती हूं कि आप अपने पड़ोसी के बारे में चिंतित रहे क्या आप अपने पड़ोसी को जानते हो
  • यदि आप चाहते हैं कि एक प्रेम संदेश सुना जाए तो पहले उसे भेजें जैसे एक चिराग को जलाए रखने के लिए हमें दिए में तेल डालते रहना पड़ता है
  • करीबी लोगों की देखभाल लेने के द्वारा शुरू होता है जो आपके घर पर है
  • अकेलापन और अवांछित रहने की भावना सबसे भयानक गरीबी है
  • यार हर मौसम में होने वाला फल है और हर व्यक्ति के अंदर है
  • कई लोग हमारे कार्य को व्यवसाय मानते हैं लेकिन हमारा व्यवसाय यीशु का प्रेम है
  • शांति एक मुस्कान के साथ शुरू होता है
  • आज के समय की सबसे बड़ी बीमारी कुष्ठ रोग या तपेदिक नहीं है बल्कि अवांछित अनवांटेड रहने की भावना है
  • कल तो चला गया आने वाला कल अभी आया नहीं हमारे पास केवल आज है आइए अभी शुरुआत करें।

मदर टेरेसा पर हुए विवाद ( Mother Teresa Controversy )

इस व्यापक प्रशंसा के बावजूद मदर टेरेसा के जीवन और काम को विवादों के घेरे में ला खड़ा किया। कहते हैं सफलता जहां होती है विवाद उसके पीछे पीछे चले आते हैं मदर टेरेसा के इस निः स्वार्थभाव भाव की दया और प्रेम को भी लोग गलत समझने लगे और उन पर आरोप लगाया गया कि वे भारत में लोगों का धर्म परिवर्तन करने की नियत से सेवा करती है लोग उन्हें अच्छा इंसान ना समझ कर ईसाई धर्म का प्रचारक समझते थे इन सब बातों से ऊपर मदर ट्रेसा अपने कामों की ओर ध्यान लगाती थी लोगों की बातों को न ध्यान देते हुए उन्हें अपने काम को ज्यादा तवज़्ज़ो दी।  

मीडिया द्वारा आरोप- 

दर्जी एक लेखक हैं जिनका जन्म कोलकाता में हुआ कल पता नहीं पहले चटर्जी अब इंग्लैंड में रहते हैं अरूप चटर्जी पेशे से डॉक्टर हैं उन्होंने एक किताब लिखा “मदर टेरेसा :”द फाइनल वर्डिक्ट”

उस किताब में अरूप चटर्जी ने मदर टेरेसा के काम पर कई सवाल उठाए हैं। अरूप चटर्जी कुछ समय के लिए वह मदर टेरेसा के संस्थान मिशनरीज ऑफ चैरिटी में काम कर चुके हैं पुलिस टॉप चटर्जी का दावा है कि मदर ने गरीबों के लिए किए गए अपने काम को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया है उनके मुताबिक ऐसा अक्सर कहती रही है कोलकाता की सड़कों और गलियों से बीमार व्यक्तियों को उठाती थी

लेकिन असल में उन्होंने या उनकी सहयोगी उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया है लोग जब उन्हें बताते थे कि फलाना जगह कोई बीमार पड़ा है तो उनसे कहा जाता था कि 102 नंबर पर फोन कर लो
चटर्जी के मुताबिक संस्था के पास कई एंबुलेंस है लेकिन उनका मुख्या काम ननो को प्रार्थना के लिए एक जगह से दूसरी जगह ले जाना है।  चटर्जी ने संस्था के इस दावे पर सवाल उठाया है की वह कोलकाता में रोज हजारों लोगों को खाना खिलाती है।  
चटर्जी के किताब के मुताबिक शंस्था के 2 या 3 किचन रोज ज्यादा से ज्यादा 300 लोगो को ही खाना देते है।  वो भी सिर्फ मुख्या रूप से उन गरीब ईसाईयो को जिनके पास संगठन द्वारा जारी किया गया फ़ूड कार्ड होता है। 

मदर टेरेसा पर लगाए गए गंभीर आरोप – 

वरिष्ठ साविष्णु नागर अपने एक लेख में लिखते है “यह कहना की मदर टेरेसा सड़क पर पड़े, मौत से जूझ रहे सभी गरीबो की मसीहा थी, तो ये गलत है।

इन मिशनों में से ज्यादातर में साफ़ सफाई तक का ठीक इंतज़ाम  नहीं था। वहा बीमार का जीना और स्वस्थ होना मुश्किल था। वह अच्छी देख रेख नहीं होती थी, भोजन तथा दर्द निवारक औषधिया तक वह नहीं होती थी।

उन्होंने उन्होंने गरीबो और बीमारों के लिए 100 देशो में 517 चैरिटी मिसन स्थापित किये थे। लेकिन ऐसे मिसनो का दौरा करने के बाद डॉक्टरों ने पाया की ये वास्तव में जीवन देने से ज्यादा मौत देने के मिसन है।

Mother Teresha को पीड़ा से प्यार, ईसाइयत का प्रचार करने का आरोप-

अरूप चटर्जी के अनुसार, मदर टेरेसा की संस्था मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी के केन्द्रो में गरीबो का जानबूझकर ठीक से इलाज नहीं किया जाता था।  मदर टेरेसा पीड़ा को अच्छा मानती थी।

उसका मानना था की दुख आपको यीशु (Jesus) के करीब लाता है।  जिन्होंने मानवता के लिए सूली चढ़े थे।  लेकिन जब वो खुद बीमार होती थी, तो वह इलाज़ के इलाज़ के लिए भारत और विदेशो के महंगे अस्पतालों में जाती थी।

चटर्जी ने अपनी किताब में यहाँ तह कहा की मदर टेरेसा बीमार बच्चो की मदद करती थी।  लेकिन तभी, जब उनके माँ बाप एक फार्म भरने के लिए तैयार हो जाते थे। जिसमे लिखा होता था की वे बच्चो से अपना दावा छुड़वा कर उन्हें मदर की संश्था को सौप देंगे।

चर्चित डोक्युमेंट्री हेल्स एंजल जो मदर टेरेसा पर आरोप- 

1994 में मदर टेरेसा पर बनी एक चर्चित डोक्युमेंट्री हेल्स एंजल में भी कुछ ऐसे ही आरोप लगाए गए।  ब्रिटेन के चैनल फोर पर दिखाई गयी  इस फिल्म की स्क्रीप्ट क्रिस्टोफर हिंचेस” द्वारा लिखी गयी थी। 

1995 में हिंचेस ने एक किताब भी लिखी।  “द मीशिनरी पोजीशिन: मदर टेरेसा “इन थ्योरी एन्ड प्रैक्टिस किताब में हिंचेस का कहना था की मीडिया ने मदर टेरेसा का मिथक गढ़  दिया है।

जबकि सच्चाई इसके विपरीत है।  लेख का सार यह था की गरीबो का पीड़ा से उनको कोई मतलब नहीं थी।  उनकी दिलचस्पी और उनका लक्ष्य था की गरीबो की पीड़ा का इस्तेमाल करके रोमन कैथोलिक चर्च के कट्टरपंथी सिद्धांतो का प्रचार प्रसार किया जाए।

इन किताबो की खूब तारीफे हुई तो आलोचना भी हुई।  एक पाठक ने  यहाँ तक कह दिया की अगर कही नर्क है तो हिंचेस होनी इसी किताबो उसमे जाएंगे।

80 के दशक में ब्रिटैन के प्रशिद्ध अखबार में प्रकाशित एक लेख में, प्रशिद्ध नारीवादी और पत्रकार “जर्मेन ग्रीर” ने भी ऐसी बाते कही थी।  ग्रिअर ने मदर टेरेसा को एक धार्मिक साम्राज्यवादी कहा था।  जिसमे सेवा को मजबूर गरीबो में इशाई धर्म फैलाने का जरिया बनाया।

निष्कर्ष  (Conclusion )

मदर टेरेसा का जीवन परिचय (Mother Teresa Biography In Hindi ) मदर टेरेसा का जीवन परिचय” उन्होंने फुटपाथों पर रोते हुए सिसकते रोगी अथवा असहाय वयक्तियो को उठाया और अपने सेवा केन्द्रो में उनका उपचार कर स्वस्थ बनाया या काम से कम उनके अंतिम समय को शान्तिपूर्ण बना दिया।

भ्रूड़ हत्या के विरोध में पूरी दुनिया में रोष वयक्त किया यह और अनाथ और अवैध बच्चो को गोद लेकर माँ के तरह का सुख दिया दिया है।

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दुखी मानवता की सेवा ही उनके जीवन का व्रत था।  मदर टेरेसा का जीवन परिचय” उनका कामयाबी अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की उनके निधन तक उनकी संस्था मिशिनरीज ऑफ चैरिटी) 123 देशो में 690 मिसन नियंत्रित कर रही थी।

इसमें एचआईवी, कुष्ठ और तपेदिक के रोगियों के लिए धर्मशालाये शामिल थे, और साथ ही सूप,रसोई, बच्चो और परिवार के लिए परामर्श कार्यक्रम, अनाथालय और स्कूल भी थे।

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